जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। आखिरकार अमेरिका ने भारत से किया अपना वादा पूरा कर दिया। अमेरिका ने पहले जीई इंजन की डिलीवरी दे दी है। इससे देश में धड़ाधड़ फाइटर जेट का निर्माण होगा। आकाश में इतने लड़ाकू विमानों की गुंज सुनाई देगी कि दुश्मन देश खासकर चीन और पाकिस्तान कांप जाएंगे। तेजस फाइटर जेट का इंजन मिलने में देरी होने की वजह से भारत को काफी परेशान होना पड़ा है। पिछले दिनों भारतीय वायुसेना के प्रमुख एपी सिंह ने एचएएल को लेकर अपनी नाराजगी भी जताई थी। माना जा रहा था कि जियो-पॉलिटिकल हालातों की वजह से जीई एयरोस्पेस कंपनी भारत को इंजन देने में लेट कर रही थी। दो साल की देरी के बाद आखिरकार अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस ने भारत को तेजस फाइटर जेट का इंजन सौंप दिया। कंपनी ने प्रेस रिलीज जारी करते हुए इसकी पुष्टि भी कर दी है। जीई एयरोस्पेस ने कहा है कि हम अपने मूल्यवान ग्राहक एचएल के साथ भागीदारी को उत्सुक हैं। तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट एके 1 फाइटर जेट के लिए 99 एफ 404-आईएन-20 इंजनों की डिलीवर हो चुकी है। यह एचएएल के साथ हमारे 40 साल के संबंधों को मजबूती देगा। इससे भारत की की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं मजबूत होगी। यह अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को विकसित करके की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। बता दें कि एचएएल और जीई एयरोस्पेस के बीच 1980 से समझौते का पुराना इतिहास है। 2001 में एचएएल ने तेजस के लिए जीई के इंजनों का चुनाव किया था। इसके बाद कंपनी ने 2016 तक तेजस के लिए 65 इंजन सौंपे थे। उसके बाद और इंजन आर्डर न मिलने की वजह से प्रोडक्शन बंद कर दिया गया। एचएएल ने 2021 में तेजस एमके-1 ए के लिए फिर 99 लड़ाकू विमानों के इंजन का आॅर्डर दिया। आर्डर मिलने के बाद एफ404-आईएन-20 इंजनों का फिर से उत्पादन शुरू कर दिया गया। कंपनी का कहना है कि पांच सालों से बंद पड़े प्रोडक्शन को शुरू करना काफी चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद यह काम किया गया। बता दें कि तेजस एमके 1 ए अपने पुराने संस्करण तेजस एलसीए का अपग्रेडेड वेरिएंट है। इसमें इसमें उन्नत शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल यानी एएसआरएएएम लगाई जाएगी। साथ ही एस्ट्रा एमके-1 एयर टू एयर मिसाइल को भी शामिल किया जाएगा। तेजस एमके-1 ए के 20 विमान प्रति वर्ष वायुसेना को मिलेंगे। तेजस एमके-1ए की आपूर्ति 2024 से शुरू होनी थी लेकिन 2027 तक पूरे 83 विमान वायुसेना को मिल जाएंगे। इनमें 73 लड़ाकू विमान और 10 ट्रेनर विमान होंगे। एलसीए तेजस एमके-1ए संस्करण में फिलहाल स्वदेशी सामग्री 50 प्रतिशत है। जिस बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जाएगा। यह विमान भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। वायु सेना के अधिकारी ने बताया कि सॉफ्टवेयर में बदलाव का काम पूरा भी हो चुका है। पहला विमान अक्टूबर के अंत तक डिलीवर हो जाएगा। एचएएल के मुताबिक तेजस एमके-1ए में डिजिटल रडार चेतावनी रिसीवर, एक बाहरी ईसीएम पॉड में सुधार किया गया है। इससे दुश्मन देश के लड़ाकू विमान इसकी नजरों से बच नहीं पाएंगे। यह सटीकता से उन पर हमला करेगा और उन्हें खाक कर देगा। वहीं आत्म-सुरक्षा जैमर, एईएसए रडार से यह दुश्मन को चकमा देने में भी कामयाब हो जाएगा।
Rajneesh kumar tiwari