मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र को लेकर महाराष्ट्र में सियासी बवाल उठ खड़ा हुआ है। विभिन्न हिंदू संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि औरंगजेब की कब्र को हटा दिया जाना चाहिए। औरंगजेब की कब्र छत्रपति संभाजी नगर जिले के खुल्दाबाद में है। औरंगजेब की कब्र को हटाए जाने को लेकर ही नागपुर में हिंसा हो चुकी है और दो समुदायों के आमने-सामने की वजह से कई इलाकों में कर्फ्यू तक लगाना पड़ा। आखिर मुगल बादशाह पर की कब्र पर इतना विवाद क्यों है। नागपुर में दंगों की वजह समेत पूरे मामले पर पढ़िए जनप्रवाद की टीम की खास रिपोर्ट।
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औरंगजेब की मौत को 300 साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है। उसकी मौत 20 फरवरी, 1707 को हुई थी। औरंगजेब की जिंदगी के अंतिम साल बेहद खराब वक्त में गुजरे। इस दौरान मुगल शासन बेहद कमजोर हो गया था और मराठाओं का प्रभुत्व लगातार बढ़ रहा था। औरंगजेब 49 साल तक बादशाह रहा।
लॉर्ड जॉर्ज कर्ज़न ने लगवाई थी जाली
अमेरिकी इतिहासकार कैथरीन ऐशर ने अपनी किताब में लिखा है कि औरंगजेब की खुली कब्र उसकी अंतिम इच्छा के अनुसार ही बनाई गई थी। यह एक साधारण पत्थर से बनी थी लेकिन 20वीं सदी की शुरूआत में इसे सफेद संगमरमर से सजाया गया और इसके ऊपर मिट्टी भी डाली गई जिससे वहां पर पौधे उग सकें।
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औरंगजेब पर विवाद
औरंगजेब ने 1658 से लेकर 1707 ईस्वी तक शासन किया था, लेकिन औरंगजेब की विरासत, उसके शासन के तरीके और साम्राज्य विस्तार की नीतियों को लेकर हिन्दुस्तान में विवाद होता रहा।
12 मई 2022: आॅल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने खुल्दाबाद में औरंगजेब की मजार पर जाकर जियारत की थी। शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) दोनों ने ही उनके मजार पर जाने पर आपत्ति जताई थी। तब महाराष्ट्र भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि एआईएमआईएम विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने औरंगजेब का महिमामंडन करने की कोशिश करके देश के राष्ट्रवादी मुसलमानों का अपमान किया है। औरंगजेब इस देश के मुसलमानों के लिए कभी आदर्श नहीं हो सकता।
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मई 2022: दिल्ली भाजपा ने मांग की थी कि औरंगजेब रोड की तरह औरंगजेब लेन का नाम भी भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखा जाए।
4 जून 2023: महाराष्ट्र के अहमदनगर में पुलिस ने एक जुलूस के दौरान मुगल बादशाह औरंगजेब के पोस्टर लहराए जाने के बाद दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने कुल चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। वीडियो वायरल होने के बाद ये गिरफ्तारियां की गईं।
3 मार्च 2025: फिल्म छावा को लेकर सपा के विधायक अबू आसिम आजमी ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया है कि मुगल बादशाह औरंगजेब के बारे में दिखाया गया इतिहास गलत है। वह एक क्रूर शासक नहीं था। उन्होंने कहा कि मैं औरंगजेब को क्रूर शासक नहीं मानता। उस दौर में सत्ता संघर्ष राजनीति को लेकर था। हिंदू बनाम मुस्लिम को लेकर नहीं। औरंगजेब की सेना में कई हिंदू थे और इसी तरह छत्रपति शिवाजी की सेना में कई मुसलमान थे।
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कब्र हटाने की मांग
महाराष्ट्र के संभाजीनगर जिले में मौजूद औरंगजेब के मकबरे को हटाने की मांग तेज पकड़ने लगी। बजरंग दल एवं विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग की। हिंदू संगठनों ने धमकी दी कि यदि सरकार कार्रवाई करने में विफल रही तो वे कारसेवा करेंगे। इन धमकियों के बाद मकबरे के बाहर भारी फोर्स की तैनाती कर दी गई। बजरंग दल एवं विहिप का कहना है कि छत्रपति संभाजी नगर के खुल्दाबाद में स्थित औरंगजेब का मकबरा एक विभाजनकारी प्रतीक है। वह सांप्रदायिक कलह को बढ़ावा देता है। दोनों समूहों ने इसे हटाने की मांग करते हुए पूरे महाराष्ट्र में तहसीलदार और जिला कलेक्टर कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
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मकबरे को लेकर सियासत
औरंगजेब के मकबरे को लेकर सियासी बयानबाजी भी खूब हो हुई। कई नेताओं ने कहा है कि औरंगजेब के मकबरे को खत्म कर देना चाहिए। महाराष्ट्र की धरती पर उसके लिए कोई जगह नहीं है। विश्व हिंदू परिषद महाराष्ट्र और गोवा के क्षेत्रीय मंत्री गोविंद शेंडे ने औरंगजेब की कब्र को गुलामी का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा- औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी महाराज को मारने से पहले 40 दिनों तक यातना दी थी। ऐसे क्रूर शासक का निशान क्यों रहना चाहिए। वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक कार्यक्रम में कहा कि क्रूर औरंगजेब के बर्बर विचारों का महिमामंडन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उस विचार को वहीं कुचल दिया जाएगा। भाजपा विधायक राम कदम ने पूर्ववर्ती उद्धव ठाकरे नीत सरकार पर लोगों को औरंगजेब का महिमामंडन करने की अनुमति देने का आरोप लगाया। कदम ने कहा कि महाराष्ट्र में कुछ लोग आक्रमणकारी औरंगजेब की प्रशंसा कर रहे हैं और यह सब उद्धव ठाकरे के कार्यकाल में शुरू हुआ। तेलंगाना के गोशामहल से भाजपा विधायक हिन्दूवादी नेता टी राजा सिंह ने भी कब्र हटाने की मांग की। उन्होंने कहा- मैं वीएचपी और बजरंग दल की मांग का समर्थन करता हूं। बजरंग दल के नेता नितिन महाजन ने औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ऐसा करने में विफल रहती है तो इसका भी बाबरी मस्जिद जैसा ही हश्र होगा। दूसरी ओर शिवसेना उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने कब्र विवाद को लेकर भाजपा नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि औरंगजेब की कब्र मराठाओं के शौर्य का एक स्मारक है। यह आने वाले पीढ़ी को बताएगा कि किस तरह से शिवाजी महाराज और मराठा सैनिक आक्रांताओं से लड़ते रहे। महाराष्ट्र में कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने कहा कि बजरंग दल और वीएचपी के पास करने के लिए और कुछ नहीं बचा है। वे नहीं चाहते कि महाराष्ट्र के लोग शांति से रहें।
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कब्र को लेकर हिंसा
नागपुर में 17 मार्च 2025 को हिंसा भड़क गई। यह हिंसा कब्र को हटाने की मांग से जुड़े एक प्रदर्शन के बाद भड़की। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल जैसे संगठनों ने इस मांग को लेकर सुबह प्रदर्शन किया। जिसमें औरंगजेब के एक पुतले को जलाया गया। इसके बाद एक अफवाह फैली और फिर भीड़ जमा हो गई। शाम होते-होते स्थिति बिगड़ गई। खासकर नागपुर के महाल और हंसापुरी इलाकों में. भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। कई वाहनों और संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस पर भी हमला हुआ।
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हिंसा के पीछे की वजह
नागपुर हिंसा के पीछे की असली वजह अफवाहें थीं। विरोध प्रदर्शन के दौरान कुरान को जला देने की अफवाह फैल गई। यह विरोध प्रदर्शन विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे समूहों द्वारा आयोजित किया गया था। पुलिस को पथराव और आगजनी के बाद बिगड़ी कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करने के साथ ही आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। नागपुर की हिंसा पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त निर्देश जारी किए। हिंसा के चश्मदीदों ने पूरी घटना के बारे में जानकारी दी। उनका कहना था कि वे कुछ लोग वहां आए थे। उन्होंने अपने चेहरे ढके हुए थे। उनके हाथों में हथियार थे। उन्होंने दुकानों में तोड़फोड़ की। उन्होंने पत्थर भी फेंके। कुछ गाड़ियों को भी जला दिया।
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नागपुर में हिंसा में बांग्लादेश कनेक्शन
नागपुर में हुए दंगों के मुख्य आरोपी फहीम खान पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया। पुलिस हिंसा की अंतरराष्ट्रीय साजिश की जांच कर रही है, जिसमें बांग्लादेश कनेक्शन सामने आया। सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहों ने हिंसा को भड़काया. पुलिस ने 230 से अधिक आपत्तिजनक पोस्ट की पहचान की। महाराष्ट्र के नागपुर में हाल ही में हुई हिंसा के बाद पुलिस अब इसमें शामिल व्यक्तियों की जांच कर रही है। इस जांच के दौरान साइबर सेल को कुछ ऐसे सबूत मिले हैं जो हिंसा के पीछे बांग्लादेश का हाथ होने की तरफ इशारा कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि साइबर सेल ने सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की है, जो बांग्लादेश से संचालित हो रहा था और उसने नागपुर में बड़े पैमाने पर दंगे भड़काने की धमकी दी थी।
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कब्र को हटाया नहीं जा सकता
यह कब्र भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई के संरक्षण में है। एएसआई इसे राष्ट्रीय महत्व का स्मारक मानता है। इसलिए इसका रखरखाव केंद्र सरकार करती है। महाराष्ट्र सरकार के पास इसे हटाने का अधिकार नहीं है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार को औरंगजेब की कब्र की रक्षा करनी पड़ रही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई औरंगजेब का महिमामंडन करने की कोशिश करेगा, तो उसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। फडणवीस ने यह भी कहा कि यह कब्र कांग्रेस सरकार के समय एएसआई के तहत लाई गई थी।
समझदारी से लेना होगा काम
भारत में औरंगजेब की कब्र क्यों मुद्दा बन रहा है इस सवाल का उत्तर समझने के लिए हमें इस तथ्य पर गौर करना होगा। एक तबके के कुछ लोगों की भावनाओं मुगल बादशाहों से जुड़ी हैं। अफजल खान जिसे शिवाजी ने अपने बघनखे से मार गिराया था। उसकी कब्र को अभी पिछले 20 सालों में सजा सवांरकर मस्जिद का रूप देने की कोशिश की गई। बंबई बमकांड के आरोपी याकूब मेनन की कब्र को सजाया संवारा गया। ऐसा नहीं होना चाहिए। वहीं अगर कुछ लोगों के इस कदम के विरोध में स्थानीय मुस्लिम जनता आगे आई होती तो जाहिर है कि उसे सांप्रदायिक एकता का मिसाल माना जाता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। देखा जाए तो इस पूरे विवाद में जड़ में कुछ ऐसे लोग हैं जो देश में सांप्रदायिक सद्भाव नहीं चाहते हैं। उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो भारतीय ईसाई कभी डायर, डलहौजी या क्लाइव की कब्र पर फूल या चादर नहीं चढ़ाते। समस्या इसलिए है क्योंकि कुछ लोग मजहब को राष्ट्र के ऊपर मानते हैं। भारत में तुष्टिकरण की राजनीति के चलते उदारवादियों का पूरा गिरोह आतंकवादियों तक के लिए सम्मान दिखाने लगता है। यही कारण है कि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को ओसामा जी और हाफिज सईद जी बोलना पड़ जाता है। औरंगजेब के हाथ भारत में कई महान गुरुओं और राजाओं के खून से रंगे हुए हैं। वही औरंगजेब जिसने अपने पिता और भाइयों की हत्याकर गद्दी हथियाई। औरंगजेब को कोई संत या फकीर नहीं था कि उसकी कब्र पर फातिहा पढ़ने की मजबूरी हो। औरंगजेब का नाम हिंदुओं के मंदिर तोड़ने और हिंदू तीर्थ पर जजिया कर लगाने के लिए ही जाना जाता है। हिंदुओं के साथ सौहार्द दिखाने के लिए मुस्लिम समुदाय को ऐसे आतताइयों से दूरी बनानी ही चाहिए। आखिर गाजा में जब इजरायल अत्याचार करता है तो लाखों हिंदू इजरायल की कार्रवाई की निंदा करते हैं. औरंगजेब, याकूब मेनन, अफजल गुरु, सालार गाजी जैसे लोगों से समुदाय जितना अपनापन दिखाएगा उतना ही इस मुद्दे पर सियासत करने वालों के लिए खाद पानी मिलता जाएगा।
Rajneesh kumar tiwari