जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। नासा ने रहस्यमयी ब्लैक होल से पर्दा उठाया है। इसे नरक का दरवाजा माना जा रहा है। इसका आकार सूर्य के 2.6 अरब गुना बड़ा है। इसमें पूरी दुनिया समा सकती है। इस खोज ने ब्रह्मांड के रहस्यमयी नियमों पर फिर से बहस छेड़ दी है। इसने पूरे वैज्ञानिक समुदाय को चौंका दिया है। यह ऐसा ब्लैक होल है जिसे देखना और समझना दोनों ही चुनौतीपूर्ण है। नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप द्वारा खींची गई तस्वीरों के माध्यम से अंतरिक्ष के अज्ञात राज का पता चला है। जिसमें एम87 के केंद्र में एक शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल का पता चला। बता दें कि पृथ्वी से 52 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित इस विशाल आकाशगंगा में 100 बिलियन से अधिक तारे हैं। इन्हीं तारों के केंद्र में ऐसा अजूबा मिला है जो वैज्ञानिकों के जो समझ से बाहर है। यह एक ब्लैक होल है। जो अपनी विशाल गुरुत्वाकर्षण शक्ति से अंतरिक्ष और समय को विकृत कर रहा है। जिससे यह रहस्यमय और डरावने तत्व के रूप में जा रहा है। वैज्ञानिकों की मानें तो इसे समझने के लिए अधिक शोध की आवश्यकता है। बता दें कि वैज्ञानिकों ने इस तरह के ब्लैक होल की मौजूदगी का अनुमान पहले ही लगा लिया था। वहीं इसकी वास्तविकता और प्रभावों को समझना मुश्किल था। 1978 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी के खगोलशास्त्री पीटर यंग और उनकी टीम ने एम 87 के केंद्र में एक अद्वितीय गुरुत्वाकर्षण शक्ति को देखा था, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी। इसका कारण यह था कि उस समय पृथ्वी पर स्थित दूरबीनों से इसकी सटीककता नहीं साबित की जा सकती थी। अब गैरी लिंड्स जैसे खगोलज्ञों ने नासा द्वारा प्राप्त की गइई तस्वीरों का विश्लेषण किया। शोध के दौरान इस ब्लैक होल का अस्तित्व समझ आया है। एमके का ध्रुवीय प्लाज्मा प्रवाह हजारों प्रकाशवर्षों तक फैला है। इसे ब्लैक होल द्वारा उत्पन्न अत्यधिक ऊर्जा से शक्ति मिलती है। इस आकाशगंगा के केंद्र से एक्स-रे और रेडियो विकिरण भी निकलते हैं। जो इसे एक शक्तिशाली और ऊर्जा से भरपूर आकाशीय वस्तु बनाते हैं। एम के 87 के केंद्र में तारों का घनत्व भी अविश्वसनीय रूप से ज्यादा है। यह घनत्व सामान्य विशाल आकाशगंगाओं के मुकाबले कम से कम 300 गुना अधिक है। हमारे सूर्य के आस-पास के तारे के क्षेत्र से 1000 गुना घना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस अत्यधिक घनत्व का कारण ब्लैक होल की विशाल गुरुत्वाकर्षण शक्ति है। जो पदार्थ को अपने इवेंट होराइजन वापस लौटने का बिंदु की ओर खींचता है। बता दें कि ब्लैक होल्स वे क्षेत्र होते हैं जहां गुरुत्वाकर्षण इतनी ताकतवर होती है कि प्रकाश भी वहां से भाग नहीं सकता। ये तब बनते हैं जब विशाल तारे अपने अंत में गिरकर अत्यधिक सघन और घने हो जाते हैं। ब्लैक होल्स की शक्तियां इतनी प्रचंड होती हैं कि ये समय और अंतरिक्ष को विकृत कर सकते हैं। साथ ही तारों को निगलने की क्षमता रखते हैं।
Rajneesh kumar tiwari