देश की अखंडता पर हमला करने वाले लोगों पर लगाम लगाने के लिए संसद में नया विधेयक पेश किया गया है। इस बिल का नाम 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025 यानी (अप्रवासन और विदेशी विधेयक 2025) है। इसके कानून बनने के बाद बांग्लादेशी हो या पाकिस्तानी, हमारे देश में रहने वाले किसी भी विदेशी नागरिक को बख्शा नहीं जाएगा। उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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खतरा बनते घुसपैठिए
अमेरिका के बाद अब भारत सरकार ने भी अवैध प्रवासियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाने की सोच ली है। इसकी जरुरत इसलिए पड़ी क्योंकि अवैध घुसपैठिए देश के लिए बड़ी समस्या बन रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत-बांग्लादेश का 4,096 किलोमीटर लंबा बॉर्डर है। भारत-बांग्लादेश बॉर्डर जंगल, पहाड़ और नदियों के बीच से गुजरता है। बॉर्डर से अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों का आना भारत के लिए सीमा पर सबसे गंभीर समस्या है। ये अवैध प्रवासी भारत की अर्थव्यवस्था, राजनीति, समाज और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं। ये बॉर्डर के इलाकों में तो बस ही चुके हैं बल्कि उत्तर-पूर्वी राज्यों के अलावा, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु समेत देश के लगभग हर राज्य तक पहुंच चुके हैं। ऐसे लोगों का सिलीगुड़ी कॉरिडोर में बसना देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है, खासतौर पर जब चीन, पाकिस्तान के साथ बांग्लादेश की नजदीकियां बढ़ रही हैं, जहां शेख हसीना को हटाए जाने के बाद कट्टरपंथियों के हौसले बढ़े हैं।
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बिल में कड़े प्रावधान
भारत में अवैध रूप से घुसपैठ करने वाले विदेशी नागरिकों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने इमिग्रेशन और फॉरेनर्स बिल 2025 पेश किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बिल को संसद में पेश किया। माना जा रहा है कि इस नए कानून से मौजूदा कानूनी प्रावधानों को और कड़ा किया जाएगा, ताकि देश में अवैध घुसपैठ पर रोक लगाई जा सके। यह बिल जब कानून का रूप ले लेगा, तब इमिग्रेशन और नागरिकों से जुड़े पुराने कानून खत्म कर दिए जाएंगे। विधेयक की खास बातों में अगर कोई शख्स जाली दस्तावेजों के माध्यम से भारत में प्रवेश करने या भारत से विदेश जाने के लिए जाली पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल करता है तो ऐसे मामलों में आरोपी के खिलाफ दो से सात साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही एक लाख से 10 लाख रुपए तक का जुमार्ना भी लगाया जाएगा। जबकि वैलिड पासपोर्ट और वीजा के भारत में घुसपैठ करने वालों के खिलाफ सख्ती करते हुए उन्हें पांच साल तक की सजा या पांच लाख रुपए तक का जुमार्ना या दोनों एक साथ किए जा सकते हैं।
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वीजा खत्म होने पर स्टे किया तो एक्शन
यह बिल एयरलाइंस, शिप और ट्रांसपोर्ट के ऐसे तमाम साधनों और कंपनियों पर सख्ती करता है, जो उचित दस्तावेजों के विदेशों से लोगों को भारत लाने या फिर भारत से विदेश ले जाने में संलिप्त होंगे। ऐसे ट्रांसपोर्टर के खिलाफ पांच लाख रुपए का जुमार्ना और उनका वाहन भी जब्त किया जा सकता है।
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पुलिस-इमिग्रेशन अफसर को ज्यादा शक्ति
यह विधेयक पुलिस और इमिग्रेशन आॅफिसर को और अधिक शक्ति प्रदान करता है। ऐसे किसी भी मामले में पुलिस अधिकारी बिना वारंट के आरोपी को गिरफ्तार कर सकेंगे, जो कि भारत में अवैध रूप से घुसे हैं या फिर जाली दस्तावेजों पर प्रवेश करने जैसे अन्य गैर कानूनी कदम उठाए हैं। बिल में विदेशियों के भारतीय अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और अन्य ऐसी जगहों पर भी विदेशियों की जांच करने की और शक्ति प्रदान करेगा। जो पहले आदेश हुआ करती थी लेकिन इस विधेयक के कानून बनने के बाद कानून का रूप ले लेंगी। यह विधेयक विदेशियों को भारत से हटाने, उन्हें उनके देश डिपोर्ट करने या छूट देने जैसे तमाम मामलों में केंद्रीय शक्ति को बढ़ाएगा।
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चार पुराने कानूनों की लेगा जगह
विदेशी नागरिकों को अपने खर्च पर भारत से बाहर निकलना होगा और पहचान के उद्देश्य से बायोमेट्रिक डेटा देना होगा। प्रस्तावित कानून विदेशी अधिनियम 1946, पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920, विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम 1939 और आव्रजन (वाहक दायित्व) अधिनियम 2000 सहित कई औपनिवेशिक युग के कानूनों को बदलने की कोशिश है। ये कानून, मूल रूप से विश्व युद्ध के समय युद्धकालीन परिस्थितियों के लिए बनाए गए थे। अब पुराने हो चुके हैं। सरकार का तर्क है कि आव्रजन नियमों को आधुनिक बनाने और गैर जरूरी प्रावधानों को खत्म करने के लिए एक एकीकृत कानून की जरूरत है।
क्यों लाया गया यह बिल?
इस बिल को लेकर गृह राज्यमंत्री राय ने साफ कर दिया कि यह विधेयक किसी को देश में आने से रोकने के लिए नहीं है। इस बिल का साफ उदृदेश्य है कि कोई भी व्यक्ति भारत में आए, वो नियम कायदों का पालन करते हुए आए। हालांकि इस बिल विपक्ष ने विरोध भी किया है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और तृणमूल कांग्रेस के सौगात राय ने इस बिल को लेकर विरोध जताया।
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राजनीति पर असर
बिल के कानून बन जाने पर राजनीत पर भी असर पड़ेगा। बता दें कि 2003-04 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेशी घुसपैठिए देश में 25 लोकसभा सीटों और 120 विधानसभा सीटों पर प्रभावी भूमिका में हैं। रिपोर्ट में बताया गया था कि 2003 तक दिल्ली में 6 लाख बांग्लादेशी घुसपैठिए भारतीय पहचान पत्र हासिल कर चुके थे। लगभग यही स्थिति देश के कई अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में हो सकती है। अनुमान है कि अभी 3-5 करोड़ अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए भारत में रह रहे हैं। इनमें से कुछ गलत गतिविधियों में सक्रिय हो सकते हैं।
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आईएसआइई का खेल होगा खत्म
सितंबर 11, 2001 के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआइई ने बांग्लादेश में आतंकी गतिविधियां और तेज कर दी थीं। 2002 में कोलकाता में कई एजेंटों की गिरफ्तारी हुई थी, जो बांग्लादेश बॉर्डर पार कर भारत आए थे। तब भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने संसद में कहा था कि ढाका में पाकिस्तानी हाई कमिशन, आईएसआइई का नर्व सेंटर है, जो भारत के खिलाफ आंतकी गतिविधियों में लिप्त है। उन्होंने यह भी बताया था कि कई उग्रवादी संगठनों ने बांग्लादेश में ट्रेनिंग कैंप बना लिए हैं और बॉर्डर के करीब बड़ी संख्या में मदरसे भी बने हैं।
Rajneesh kumar tiwari