पाकिस्तान से अलग होने की बलूचिस्तान की मांग ने बेहद हिंसक रूप ले लिया है। बलूच लिबरेशन आर्मी ने मार्च महीने में ट्रेन हाईजैक करके हड़कंप मचा दिया था। इसके बाद पाकिस्तानी सेना पर भी हमलावर हो गई। आशंका है कि बलूचों के बाद यहां कई और अलगाववादी आंदोलन तेज हो सकते हैं। अलग बलूच की मांग के इतिहास समेत पूरे घटनाक्रम पर पढ़िए जनप्रवाद की खास रपट।
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खुद के बिछाए जाल में फंसा पाक
आतंकियों को पालने-पोसने के लिए मशहूर पाकिस्तान अब अपने बिछाए जाल में खुद फंस गया है। पाकिस्तान के सुरक्षा बलों के लिए नवंबर 2024 का महीना घातक महीनों में से एक रहा। इस महीने देश में आतंकी हमलों और मुठभेड़ में 68 सुरक्षा बलों समेत 245 लोगों की मौत हो गई। हताहतों में 127 आतंकी और 50 नागरिक शामिल हैं। आतंकी हमलों और हताहतों को देखते हुए अगस्त के बाद नवंबर को दूसरा सबसे घातक महीना माना गया। अगस्त में 92 नागरिकों, 108 आतंकियों और 54 सुरक्षा बलों के जवानों समेत 254 लोगों की मौत हुई थी। नवंबर में सबसे ज्यादा सुरक्षा कर्मियों की मौत दर्ज की गई है। इससे पहले अक्तूबर में 62 सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई थी। मार्च 2025 में यह हमला और तेज हो गया।
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ट्रेन को किया हाईजैक
पाकिस्तान में 39 अप जाफर एक्सप्रेस पेशावर जाने के लिए 11 मार्च की सुबह 9 बजे क्वेटा से रवाना हुई थी। दोपहर 1 बजे उस पूरी की पूरी ट्रेन को हाईजैक कर लिया गया था। 11 मार्च की दोपहर 1 बजे बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ट्रेन को निशाना बनाया और इंजन की तरफ रॉकेट लॉंचर दागे। 14 मार्च को पाकिस्तानी आर्मी पहली बार मीडिया को लेकर मौके पर पहुंची थी। जहां का मंजर बेहद खौफनाक था। ट्रेन के नीचे पहियों के बीच कई लाशें पड़ी थीं। एक जगह पर रेल की पटरी भी टूटी हुई थी। वहीं रेस्क्यू आॅपरेशन खत्म हो जाने के बाद बीएलए ने दावा किया है कि जाते वक्त दो सौ से ज्यादा मुसाफिर उसके कब्जे में थे। जिन्हें उन लोगों ने मार दिया। हालांकि पाकिस्तानी फौज का कहना था कि बलूचिस्तान के कच्छी जिले के माच टाउन के आब-ए-गम इलाके के पास विद्रोहियों ने ट्रेन को हाईजैक किया। हथियारबंद लोगों ने ट्रेन पर गोलीबारी की, जिससे यात्रियों में दहशत फैल गई। ट्रेन में 440 यात्री सवार थे। विद्रोहियों ने 21 बंधकों की हत्या कर दी। सुरक्षाबलों ने सभी 33 हमलावरों को मार गिराया और अन्य सभी यात्रियों को बचा लिया गया। ट्रेन हाईजैक की खबर के बाद नुस्की में पाकिस्तानी आर्मी के काफिले पर भी हमला किया गया। सेना के 8 मिलिट्री गाड़ियों पर हमले किए गए। जिसमें 90 से ज्यादा सैनिकों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। बीएलए की ओर से इस हमले की जिम्मेदारी ली गई थी। बीएलए ने कहा था कि उसके मजीद ब्रिगेड और फतेह स्क्वॉड ने सेना के काफिले को टार्गेट किया। ये हमला आत्मघाती था, जिसमें एक बड़ा धमाका हुआ था।
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बलूचिस्तान में आजादी की मांग
पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत सबसे अशांत माना जाता है, यहां पर हिंसा भी काफी ज्यादा देखने को मिल जाती है। हाल के दिनों में जिस तरह से बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने पाक सेना को निशाने पर लिया है, यह पूरा इलाका ही फिर चर्चा में आ चुका है। अब सभी की नजर में बलूचिस्तान में हिंसक प्रदर्शन के जरिए आंदोलन किया जा रहा है। बलूच लोग लगातार पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगाते रहे कि वो उनके रिसोर्सेज का इस्तेमाल तो कर रही है, लेकिन बदले में कोई फायदा नहीं दे रहा। ये असंतोष हाल का नहीं, बल्कि इसकी जड़ें आजादी के समय की हैं। ब्रिटिश दौर के खत्म होते-होते बलूचिस्तान भारत या पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बना, बल्कि एक अलग रियासत बन गया। वहां की संसद ने आजादी के पक्ष में वोट किया। मार्च 1948 में जब यह साफ हो गया कि ब्रिटिश शासन भारत से जा रहा है, तब बलूचिस्तान में मकरान, लास बेला, खरान और कलात के कबायली प्रमुखों में कलात के प्रमुख सबसे ताकतवर थे। उस वक्त अहमद यार खान कलात के खान यानी प्रमुख थे। भारत की आजादी के वक्त ब्रिटिश साम्राज्य ने यहां की रियासतों को दो विकल्प दिया। पहला- ये रियासतें भारत या पाकिस्तान के साथ मिल जाएं। या फिर दूसरा- स्वतंत्र रहें। उस वक्त अहमद यार खान ने बलूचिस्तान की आजादी की वकालत की। बताया जाता है कि अहमद की इस मांग के पीछे उनकी मोहम्मद अली जिन्ना से निजी दोस्ती थी। उन्हें उम्मीद थी कि जिन्ना बलूचिस्तान को पाकिस्तान में शामिल होने की जगह आजादी दिलाने में समर्थन देंगे।
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पाकिस्तान ने कैसे दिया धोखा?
कलात के प्रमुख अहमद यार खान के अंतर्गत बलूचिस्तान के क्षेत्रों को संभाल रहे तीन कबायली नेता पाकिस्तान में मिलने के लिए तैयार हो गए। इस स्थिति को भांपते हुए पाकिस्तान ने अक्तूबर 1947 में ही 'दोस्ती की संधि' को तोड़ते हुए पूरे बलूचिस्तान को शामिल कराने की कोशिशें शुरू कर दीं। 17 मार्च 1948 को पाकिस्तान सरकार ने कलात के अंतर्गत आने वाले तीन सामंती क्षेत्रों को अपने साथ शामिल करा लिया। इससे न सिर्फ कलात के खान की ताकत घट गई, बल्कि यह पूरा क्षेत्र चारों तरफ से जमीनी सीमाओं से भी घिर गया, जबकि पहले यह पूरा इलाका अरब सागर से जुड़ा था। स्टेट एंड नेशन बिल्डिंग इन पाकिस्तान, बियॉन्ड इस्लाम एंड सिक्योरिटी' किताब के मुताबिक जब कलात पर पाकिस्तान में शामिल होने का दबाव बढ़ रहा था, उसी दौरान भारत में आॅल इंडिया रेडियो पर एक खबर चली। इसमें दावा किया गया कि कलात भारत के साथ शामिल होना चाहता है। हालांकि, पाकिस्तान ने इस खबर के प्रसारित होने के ठीक बाद 26 मार्च 1948 को अपनी सेना की एक बड़ी टुकड़ी बलूचिस्तान भेज दी। इसके बाद कलात के खान ने पाकिस्तान के साथ संधि का एलान कर दिया। माना जाता है कि पाकिस्तान के सैन्य अभियानों के डर से अहमद यार खान को यह फैसला लेने पर मजबूर होना पड़ा।
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बलूचिस्तान का क्षेत्रफल
पाकिस्तान के नक्शे पर दक्षिण-पश्चिम में स्थित बलूचिस्तान इस देश का सबसे बड़ा प्रांत है। पाकिस्तान के 8.81 लाख वर्ग किलोमीटर इलाके में करीब 40 फीसदी हिस्सा यानी 3.47 लाख वर्ग किमी अकेले बलूचिस्तान का है। आबादी के लिहाज से पाकिस्तान की 24.75 करोड़ की आबादी में से सिर्फ 1.49 करोड़ लोग बलूचिस्तान में बसे हैं। यानी पूरे पाकिस्तान की महज छह फीसदी आबादी यहां रहती है।
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क्यों चाहते हैं आजादी
- बलूचिस्तान के पास पूरे देश का 40% से ज्यादा गैस प्रोडक्शन होता है। ये सूबा कॉपर, गोल्ड से भी समृद्ध है। पाकिस्तान इसका फायदा तो लेता है, लेकिन वहां की इकनॉमी खराब ही रही।
- बलूच लोगों की भाषा और कल्चर बाकी पाकिस्तान से अलग है। वे बलूची भाषा बोलते हैं, जबकि पाकिस्तान में उर्दू और उर्दू मिली पंजाबी चलती है। बलूचियों को डर है कि पाकिस्तान उनकी भाषा भी खत्म कर देगा, जैसी कोशिश वो बांग्लादेश के साथ कर चुका है।
- सबसे बड़ा प्रांत होने के बावजूद इस्लामाबाद की राजनीति और मिलिट्री में इनकी जगह नहीं के बराबर है।
- पाक सरकार पर बलूच ह्यूमन राइट्स को खत्म करने का आरोप लगाते रहे। बलूचिस्तान के सपोर्टर अक्सर गायब हो जाते हैं, या फिर एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग के शिकार बनते हैं।
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हमलों का ग्राफ ऊंचा
पाकिस्तान में बलूचिस्तान की मांग को लेकर कई चरमपंथी गुट खड़े हो गए। उनके पास संसाधन कम थे। ऐसे में लंबी ट्रेनिंग देकर लड़ाकों को मजबूत बनाने का वक्त नहीं था। ये डर भी था कि अगर ब्लास्ट में शामिल लोग पकड़े जाएं तो सरकार गुट के अंदर तक पहुंच सकती है। इसी डर से बचने के लिए सुसाइड बॉम्बिंग को बढ़ावा मिला। खुद पाकिस्तान की नेशनल पार्टी के सांसद फुलैन बलूच दावा कर चुके कि बीएलए के पास बहुत ज्यादा सुसाइड बॉम्बर हो चुके हैं।
पाकिस्तान के विभाजन की आशंका
मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान की सीनेट में गंभीर बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान के 6-7 जिले पूरी तरह आतंकियों के कब्जे में हैं। पाकिस्तान सरकार और सेना का इन इलाकों पर कोई नियंत्रण नहीं है, और यह परिस्थिति पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। उनका कहना था कि यह सब पाकिस्तान के लिए आश्चर्यजनक नहीं है। देश टूटने की कगार पर है। मौलाना ने चेतावनी दी कि अगर यह स्थिति बनी रहती है, तो पाकिस्तान चार टुकड़ों में बंट सकता है।
Rajneesh kumar tiwari