तकनीक सही दिशा में काम करे तो मानवता के लिए वरदान बन जाती है। यह बात हर क्षेत्र में लागू होती है। चाहे चिकित्सा, वैज्ञानिक प्रयोग हो या अन्य कोई क्षेत्र। वहीं जब यही तकनीक गलत दिशा में काम करने लगे तो तकनीक भस्मासुर बन जाती है। कुछ ऐसा ही ग्रोक एआई के साथ हुआ।
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ग्रोक एआई की दस्तक
लाचिंग के साथ ही ग्रोक एआई ने पूरी दुनिया में धूम मचा दी। लोग इस चैटबॉट के दीवाने हो गए। सवाल पूछते ही मजेदार जवाब मिल रहा है। बता दें कि ग्रोक एआई एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट है। इस चैटबॉट को एलन मस्क के एआई रीसर्च आॅर्गनाइजेशन एक्स एआई की ओर से बनाया गया है। इसको बनाने के पीछे का उद्देश्य ये है कि ये लोगों के पूछे गए सवालों का जवाब देने और बाकी अन्य कामों को आसान बनाएगा। यह तीखे सवालों के जवाब भी दे सकता है। ग्रोक को प्रीमियम प्लस एक्स सब्सक्रिप्शन के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है। मस्क ने चैटजीपीटी को जवाब देने के लिए इसे बनाया है। उनका मानना है कि चैटजीपीटी बहुत वामपंथी और खतरनाक है। इसका लक्ष्य ओपनएआई से मुकाबला करना है। अगर कोई भी यूजर ग्रोक से सवाल करना चाहता है को उसे एक्स पर एटदरेट ग्रोक एआई को को टैग करना होगा। इसके बाद अपने सवाल पूछ सकते हैं।
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ग्रोक एआई को लेकर विवाद
नेशनल एसोसिएशन आफ सेक्रेटरीज आफ स्टेट ने आरोप लगाया कि ग्रोक ने अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दौड़ के बारे में गलत सूचना देने में योगदान दिया। इसके अलावा भारत में कई नेताओं के बारे में इसने गलत जवाब देने और सवालों का जवाब देने में गाली का प्रयोग करने का आरोप लगा। वहीं मस्क का ग्रोक पर नियंत्रण और एक्स की असीमित ताकत भी चिंता का विषय है, जिसमें संभावित रूप से आपत्तिजनक पोस्ट भी शामिल है। ऐसे में ग्रोक कई बार गालीबाज भी बन जाता है। वह यूजर्स को अनफिल्टर्ड जवाब देने लग जाता है।
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ग्रोक एआई ने सबको चौंकाया
एलन मस्क के स्वामित्व वाले मंच एक्स पर पेश होने के बाद शक्तिशाली एआई चैटबॉट ग्रोक ने अपने तीखे अंदाज से चौंका दिया। ग्रोक ने उपयोगकतार्ओं के उकसाए जाने पर हिंदी में अपशब्दों से भरी भाषा का इस्तेमाल किया। इसकी प्रतिक्रियाओं ने उपयोगकतार्ओं को भ्रमित कर दिया और सोशल मीडिया पर एआई के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई। ग्रोक एआई ने कुछ उपयोगकतार्ओं ने एक्स पर भारतीय नेताओं से जुड़े सवाल ग्रोक से पूछे, जिनके जवाब कई बार विवादास्पद पाए गए।
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विवाद पर जांच
सोशल मीडिया मंच एक्स पर मौजूद एआई टूल ग्रोक विवादित कंटेंट से जुड़ा विवाद गहराया गया। एक तरफ जहां सोशल मीडिया मंच एक्स के एआई चैटबॉट ग्रोक की तरफ से दिए जाने वाले जवाबों में हिंदी अपशब्दों का भी इस्तेमाल करने की घटना को लेकर सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय जांच करेगा। बता दें कि सूत्रों ने 19 मार्च, 2025 को यह जानकारी दी। सरकारी सूत्रों का कहना है कि ग्रोक के सभी विवादित कंटेंट के लिए एक्स ही जिम्मेदार है। मंत्रालय ने कहा है कि उसने ग्रोक या एक्स को कोई नोटिस नहीं भेजा है। मंत्रालय एक्स और ग्रोक के साथ बातचीत कर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारी एक्स के अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं और जांच कर रहे हैं कि किस स्तर पर भारतीय कानून का उल्लंघन किया गया है। इस मसले पर संसदों में सख्ती से निपटने पर राजनीतिक सहमति बनती दिख रही है। पूर्व कानून राज्य मंत्री और बीजेपी के लोकसभा सांसद, पीपी चौधरी का मानना है कि ग्रोक को लेकर उठे विवाद के बाद यह महत्वपूर्ण हो गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जनरेट होने वाले कंटेंट और एआई प्लेटफार्म पर कानून जरूरी है। जिस तरह सोशल मीडिया को रेगुलेट करने के लिए कानून में सोशल मीडिया कंपनियों के जवाबदेही तय की गई है। उसी तर्ज पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से इनफॉरमेशन जनरेट करने वाले प्लेटफार्म की जवाबदेही भी तय करना होगा। कांग्रेस भी आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म्स तो सख्ती से रेगुलेट करने के लिए एक नए लीगल फ्रेमवर्क के पक्ष में है।
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सरकार की सख्ती और पुराने मामले
पिछले साल, गूगल के एआई टूल जेमिनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी, जिसके बाद सरकार ने तुरंत कार्रवाई की और एआई कंटेंट पर नए दिशा-निर्देश जारी किए। सरकारी सूत्र ने बताया कि सोशल मीडिया पर कंटेंट को लेकर पहले से गाइडलाइंस लागू हैं और कंपनियों को उनका पालन करना जरूरी है।
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बढ़ता दायरा और चुनौतियां
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से अब तक कई सेक्टर्स में काफी सुधार देखा जा रहा है। एआई के पॉजिटिव पॉइंट्स हालांकि बहुत हैं, लेकिन इनसे जुड़े खतरे भी डरानेवाले हैं। सबसे पहली चिंता है आॅटोनॉमी है। एआई उद्योगों और ग्लोबल टेक्नोलॉजी लैंडस्केप को फिर से परिभाषित कर रहा है। यह आज के समय में टेक्नीक का सबसे उभरता हुआ क्षेत्र बन चुका है। यह न केवल टेक्निकल दुनिया को बदल रहा है बल्कि मानव जीवन के हर पहलू को प्रभावित कर रहा है। यह फील्ड टेक्नोलॉजी के साथ-साथ फाइनेंस, हेल्थकेयर, आटोमोबाइल और एंटरटेनमेंट जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से फैल रही है। साथ ही एआई एक्साइटिंग और उभरते करियर की नए अवसरों का रास्ते खोल रही है। इसकी फील्ड में डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसी भूमिकाओं में अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। मशीन लर्निंग इंजीनियर और सॉफ्टवेयर इंजीनियर में यह सबसे लोकप्रिय और डिमांड वाला आप्शन हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल अब फाइनेंस, हेल्थकेयर, आटोमोबाइल, और एंटरटेनमेंट जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हो रहा है। रिसर्च और डिवेलपमेंट का क्षेत्र भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में जैसे-जैसे एआई का क्षेत्र बढ़ रहा है वैसे-वैसे नई-नई चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं। जब एआई के सिस्टम जरूरत से ज्यादा स्वतंत्र हो जाएंगे और अपने फैसले खुद लेने की ताकत हासिल कर लेंगे। यह एक बड़ा खतरा बन सकता है। क्या होगा अगर एक दिन एआई इंसान की परवाह किये बिना, केवल अपनी तर्क शक्ति के आधार पर फैसले लेना शुरू कर दे? इसके नतीजतन न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संकट भी उत्पन्न हो सकता है। ग्रोक एआई विवाद से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने के सख्त पहल की मांग फिर तेज हो गई है।
Rajneesh kumar tiwari